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डॉ.भागेश्वर पात्र की रचना 'हल्बा जनजाति: संस्कृति एवं परंपराएं ' का हुआ राजधानी में विमोचन // Dr. Bhageshwar Patra's work 'Halba Tribe: Culture and Traditions' was released in the capital

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 बारूद के ढेर में फूटा साहित्य का अंकुर  डॉ.भागेश्वर पात्र की रचना 'हल्बा जनजाति: संस्कृति एवं परंपराएं ' का हुआ राजधानी में लोकार्पण -


  जिले के अबुझमाड़ क्षेत्र के ग्राम - बेचा निवासी तथा हल्बा जनजाति से संबंध रखने वाले साहित्यकार डॉ.भागेश्वर पात्र की शोधपरक कृति ' हल्बा जनजाति: संस्कृति एवं परंपराएं ' का विमोचन 4 जून, गुरुवार को  माननीय केदार कश्यप,मंत्री,वन एवं जलवायु परिवर्तन,छ.ग. शासन के करकमलों से हुआ। माननीय मंत्रीजी के नया रायपुर में स्थित निवास में आयोजित विमोचन समारोह के दौरान 

 वरिष्ठ साहित्यकार रूद्रनारायण पाणीग्राही, डॉ .संजय अलंग, आईएएस, डॉ.गितेश कुमार अमरोहित,प्रकाशक आकाश माहेश्वरी,सरस्वती बुक्स,भिलाई, सामाजिक कार्यकर्ता नंदकुमार प्रधान एवं शर्मा शांडिल्य उपस्थित थे।इस अवसर पर माननीय मंत्रीजी ने डॉ.पात्र को सामाजिक एवं साहित्यिक क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए राजकीय गमछा एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।

     पुस्तक के विमोचन से साबित हुआ कि अबुझमाड़ जैसे पिछड़े क्षेत्र में भी साहित्यिक प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।जिस अबुझमाड़ की धरती में नक्सलवाद के नाम पर कभी बारूद की चिंगारी फूटती थी,अब उसी क्षेत्र की मिट्टी से साहित्यरूपी सृजन के बीज अंकुरित हो रहे हैं। बस्तर अंचल के वरिष्ठ साहित्यकार शिवकुमार पांडेय ,बिक्रम सोनी, नरेंद्र पाढ़ी एवं अन्य ने मीडिया को बताया कि डॉ.पात्र द्वारा रचित और सरस्वती बुक्स द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक जनजातीय अध्ययन के संदर्भ में मील का पत्थर साबित होगी।यह कृति बस्तर की पहचान माने जाने वाली हल्बा जनजाति के गौरवशाली अतीत, सामाजिक ताना-बाना और सांस्कृतिक परंपराओं का गहन दस्तावेजीकरण करती है। विशेषज्ञों के अनुसार विमोचित पुस्तक में हल्बा समुदाय के सामाजिक रीति-रिवाजों, परंपराओं, लोककथाओं, लोकगीतों और जीवनशैली का व्यापक विश्लेषण किया गया है, जिससे यह जनजातीय अध्ययन और भारतीय मानव विज्ञान के शोधकर्ताओं, छात्रों और उत्साही लोगों के लिए अमूल्य संसाधन बन जाती है। भारतीय जनजातीय संस्कृति और नृवंशविज्ञान पर केंद्रित किसी भी संग्रह के लिए यह एक अनिवार्य पुस्तक है। 

     डॉ.पात्र की प्रथम रचना के विमोचन पर अ.भा.हल्बा आदिवासी समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लतेल राम नाईक, राष्ट्रीय पदाधिकारी शिवकुमार पात्र, डॉ.कृष्णपाल राणा,दामेसाय बघेल,,ललित नरेटी, कन्हैया उइके, धनश्री गावलकर,अरूण बघेल,महेश्वर मुरला,भानुप्रताप चुरेन्द्र संतुराम नुरेटी,सुंदर लाल नाग, संगीता ध्रुव,हरेश ठाकुर,मेहतूराम कुमेटी,चुम्मन सुधाकर,अभिलाल शोरी आदि शुभचिंतकों ने खुशी प्रकट करते हुए बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। 

मीडिया प्रभारी:- आर्यन चिराम 

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