बस्तर की प्रथम विद्रोहिणी
पटरानी जुगराज कुँअर ने 1878 में अपने पति राजा भैरमदेव के विरुद्ध सशक्त
विरोध प्रारंभ किया था। इस विचित्र किस्म के विद्रोह से बस्तर के आदिवासी दो खेमों में बँट
गए थे। यह विद्रोह आठ वर्षों तक चला और बस्तर के लोग आज भी इसे 'रानी चोरिस' के
रूप में जानते हैं।

चूँकि यह विद्रोह आदिवासियों से सम्बद्ध नहीं था।
अतएव उसका यहाँ
संकेत मात्र किया गया है। यह एक सफल विद्रोह था और विद्रोहिणी महिला अंत में
विजयिनी होकर उभरी।
पटरानी जुगराज कुँअर ने 1878 में अपने पति राजा भैरमदेव के विरुद्ध सशक्त
विरोध प्रारंभ किया था। इस विचित्र किस्म के विद्रोह से बस्तर के आदिवासी दो खेमों में बँट
गए थे। यह विद्रोह आठ वर्षों तक चला और बस्तर के लोग आज भी इसे 'रानी चोरिस' के
रूप में जानते हैं।

चूँकि यह विद्रोह आदिवासियों से सम्बद्ध नहीं था।
संकेत मात्र किया गया है। यह एक सफल विद्रोह था और विद्रोहिणी महिला अंत में
विजयिनी होकर उभरी।
सन्दर्भ:-
बस्तर का मुक्ति संग्राम:-१७७४-१९१० डॉ शुक्ला (मध्य पदेश हिंदी ग्रन्थ अकादमी )
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